
टाइटन पनडुब्बी में विस्फोट
जब टाइटन
पनडुब्बी संपर्क टूटा तो सर्च अभियान चलाया गया. इस अभियान में अमेरिका और
कनाडा की नौसेना के साथ कई प्राइवेट एजेंसियों ने को शामिल किया गया. दावा किया जा
रहा था कि इस पनडुब्बी में 96 घंटे का ऑक्सीजन था. हालांकि, इस दावे पर विशेषज्ञ पहले
ही संदेह जता चुके हैं. अमेरिकी कोस्ट गार्ड ने अपने बयान में कहा कि मध्य अटलांटिक
महासागर के पास पनडुब्बी का मलबा मिला है, यह स्थान उस जगह से काफी करीब था जहां
1912 में टाइटैनिक जहाज डूबा था. हालांकि अब तक इसकी पुष्टि नहीं हो पाई है कि मलबा
उसी पनडुब्बी का है.
टाइटन पनडुब्बी की क्षमता पानी में 4 हजार मीटर की गहराई तक पहुंचने की बताई गई है.
इतनी गहराई में पहुंचने पर सतह के मुकाबले पनडुब्बी पर दबाव 296 गुना बढ़ जाता है.
कैटास्ट्रॉफिक इम्प्लोजन शब्द का इस्तेमाल उस स्थिति के लिए किया जाता है जब पनडुब्बी के अंदरूनी हिस्से में इस कदर दबाव बनता है कि वो बुरी तरह डैमेज हो जाता है या फिर काम करना बंद कर देता है. HT की रिपोर्ट के मुताबिक, जब एक सीमित जगह में दबाव जरूरत से ज्यादा बढ़ जाता है और उसे संभाल पाना उस हिस्से के लिए मुश्किल हो जाता है तो ऐसे ही हालात बनते हैं. यही अंदरूनी विस्फोट की वजह हो सकता है.
हालांकि अब तक इसकी पुष्टि नहीं हो पाई है.
1912 में समुंद्र में डूबे टाइटैनिक जहाज के मलबे को देखने पहुंची टाइटन पनडुब्बी में मौजूद पांचों अरबपतियों की मौत हो गई. टाइटन
पनडुब्बी को ऑपरेट करने वाली कंपनी ओशनगेट ने इसकी पुष्ठि भी की है. कंपनी का कहना
है कि इस घटना में कंपनी के
संस्थापक और सीईओ शामिल थे.
हल्ला बोल एक्सप्रेस
https://hallabolexpress.com/
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