
भारत ने अपनी परमाणु ताकत को और मजबूत करते हुए तीसरी स्वदेशी परमाणु-संचालित पनडुब्बी, आईएनएस अरिदमन (INS Aridhaman) को नौसेना में शामिल कर लिया है। इसका कमीशनिंग समारोह 3 अप्रैल 2026 को विशाखापत्तनम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की उपस्थिति में हुआ।
यह भारत के नो-फर्स्ट-यूज़ (NFU) सिद्धांत के तहत सेकंड-स्ट्राइक (दूसरी जवाबी कार्रवाई) की क्षमता को काफी बढ़ा देता है।
आईएनएस अरिदमन की मुख्य विशेषताएं:
बढ़ी हुई मारक क्षमता: इसमें 8 वर्टिकल लॉन्च ट्यूब हैं, जो पिछले मॉडल (INS अरिहंत और INS अरिघात) से दोगुनी हैं।
मिसाइलें: यह 3,500 किमी रेंज वाली K-4 बैलिस्टिक मिसाइलें ले जाने में सक्षम है, जिससे यह बंगाल की खाड़ी से ही पाकिस्तान और चीन के बड़े हिस्सों को निशाना बना सकती है।
अधिक वजन और आकार: इसका वजन लगभग 7,000 टन है, जो पिछली पनडुब्बियों से 1,000 टन ज्यादा है।
बेहतर तकनीक: यह 83 मेगावाट के कॉम्पैक्ट लाइट वॉटर रिएक्टर द्वारा संचालित है और इसकी आवाज़ (Acoustic Signature) बहुत कम है, जिससे इसे समुद्र में ढूंढना मुश्किल है।
भारतीय नौसेना का वर्तमान परमाणु बेड़ा:
पनडुब्बी का नाम पदनाम स्थिति
INS अरिहंत S2 सक्रिय
INS अरिघात S3 सक्रिय
INS अरिदमन S4 सक्रिय (3 अप्रैल 2026 से)
INS अरिसुदन S4* समुद्री परीक्षण (Sea Trials) जारी
यह पनडुब्बी विशाखापत्तनम के पास प्रोजेक्ट वर्षा (Project Varsha) नामक रणनीतिक बेस पर तैनात रहेगी।स्त्रोत गूगल, मीडिया रिपोर्ट्स।
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