
Zoho success story
दोस्तो,श्रीधर वेम्बू तमिलनाडु से के एक मध्यमवर्गीय परिवार में पले-बढ़े. उनकी शुरुआती पढ़ाई तमिल भाषा में हुई।
इसके बाड उन्होंने आईआईटी मद्रास से 1989 में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की डिग्री ली और पीएचडी के लिए अमेरिका चले गए. अमेरिका में उन्होंने पीएचडी करने के दौरान नौकरी भी की.पीएचडी पूरी करने के बाद उन्हें और बेहतर जॉब मिल जाती लेकिन उनके करीबी उस समय हैरान रह गए क्योंकि उन्हें अपना खुद का कुछ करना था अपना खुद का स्टार्टअप ।
इसी सपना को पूरा करने के लिए 1966 में उन्होंने अपने भाई के साथ एक सॉफ्टवेयर कंपनी एडवेंटनेट की स्थापना करी ।
और 1999 में उन्होंने इसका नाम बदलकर Zoho कर दिया.
श्रीधर वेंबू ने अपनी कंपनी को चलाने के लिए किसी बड़े शहर या बड़ी नगरी को चुने से अपेक्षा अपने गांव तमिलनाडु के तेनकाशी से उसे बिजनेस की शुरुआत करने की सोची ।
श्रीधर बंबू जूहू के सीईओ और फाउंडर भी है। आज उनकी कंपनी के वैल्यूएशन 39000 करोड़ है। और यह सादा जीवन और उच्च विचार वाले व्यक्ति हैं।
इतने बड़े आदमी होने के बाद भी यह साधारण जीवन जीते हैं और साइकिल से चलते हैं।
दोस्तों जहां लोग IIT-IIM करने के बाद विदेश में जाकर नौकरी करने का सपना देखते हैं वही श्रीधर ने इस बात को साबित कर दिया कि यदि टेक्निकल नॉलेज और जज्बा है । तो आप अपने दम पर कुछ भी हासिल कर सकते हैं।
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