Success Story of Doms

Success Story of Doms

‎दोस्तों आज कि यह कहानी ऐसे व्यक्तियों की है जिन्होंने पेंसिल और रबर बेचकर 4000 करोड़ रुपये की कंपनी खड़ी कर ली है। कभी बहुत थोड़ी सी पूंजी लगाकर शुरू की गई कंपनी का आज करोड़ों रुपयों में टर्नओवर है। इस कंपनी का नाम डोम्स इंडस्ट्रीज है। साल 1975 में इसकी शुरुआत रसिकभाई रवेशिया और मनसुखलाल राजानी ने की थी। जिन्होंने साल 2005 में फ्लैगशिप ब्रांड DOMS लॉन्च किया था। बचपन में पेंसिल-इरेजर और शॉर्पनर यूज करने वालों को DOMS का नाम जरूर याद होगा। यह एक स्टेशनरी ब्रांड है। अब कंपनी जल्द ही बाजार में अपना आईपीओ लाने की तैयारी कर रही है।

‎पिछले दिनों डोम्स इंडस्ट्रीज (Doms Industries) ने इनिशियल पब्लिक ऑफर (IPO) के माध्यम से 1,200 करोड़ रुपये जुटाने के लक्ष्य के साथ मार्केट रेगुलेटर SEBI के साथ एक ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस दायर किया है। आइए आपको बताते हैं कि इस कंपनी की शुरुआत कैसे हुई।

‎डोम्स इंडस्ट्रीज की शुरुआत गुजरात में एक छोटी पेंसिल मैन्युफैक्चिरिंग कंपनी के तौर पर हुई थी। आज कंपनी भारत में 15 से ज्यादा प्रोडक्शन फैसिलिटीज चलाती है। पेंसिल, इरेजर और रूलर सहित इसके कई प्रोडक्ट्स 50 से ज्यादा देशों में सप्लाई होते हैं। आज डोम्स स्कूल स्टेशनरी, आर्ट मैटेरियल, पेपर स्टेशनरी और ऑफिस में यूज होने वाले प्रोडक्ट और फाइन आर्ट प्रोडक्ट बनाती और बेचती है।

‎डोम्स ब्रांड के सामने साल 2005 में पहले से मौजूद बड़े ब्रांड्स के बीच कस्टमर्स का भरोसा जीतना एक बड़ी चुनौती थी। लेकिन डोम्स लोगों का भरोसा जीतने में कामयाब रही और कंपनी का कारोबार तेजी से आगे बढ़ा। आज डोम्स 4 हजार करोड़ रुपये की कंपनी बन गई है। आज रसिकभाई रवेशिया के बेटे संतोष रवेशिया डोम्स के एमडी हैं। ब्रांड के मौजूदा अवतार को संतोष ने ही लॉन्च किया था। कंपनी ने पहले अपने प्रोडक्ट्स को कर्नाटक में लॉन्च किया था। इसके बाद जब सफलता मिली तब कंपनी ने इसका देश के दूसरे हिस्सों में विस्तार किया।

‎विकास की यात्रा

‎प्रारंभिक चुनौतियाँ: 2005 में, डोम्स को पहले से स्थापित बड़े ब्रांडों जैसे अप्सरा, नटराज और कैमलिन से मुकाबला करना था।

‎रणनीतिक विस्तार: कंपनी ने अभिनव उत्पादों (जैसे 'डोम्स फ्यूज़न' पेंसिल) और आकर्षक पैकेजिंग के माध्यम से बच्चों के बीच लोकप्रियता हासिल की।

‎अंतरराष्ट्रीय साझेदारी: 2012 में, डोम्स ने इतालवी बहुराष्ट्रीय कंपनी 'फैब्रिका इटालियाना लैपिस एड एफिनी' (F.I.L.A. Group) के साथ हाथ मिलाया, जिससे उसे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में प्रवेश करने और अपनी तकनीक को उन्नत करने में मदद मिली।

‎नेतृत्व: रसिकलाल के बेटे संतोष रसिकलाल रवेशिया के नेतृत्व में कंपनी ने जबरदस्त वृद्धि देखी है, जो वर्तमान में कंपनी के प्रबंध निदेशक हैं। 

‎प्रमुख कारण

‎उत्पाद नवाचार: डोम्स ने हमेशा नए और बेहतर उत्पादों को पेश करने पर ध्यान केंद्रित किया, जिससे वे बाजार में अलग पहचान बना पाए।

‎विपणन रणनीति: प्रभावी ब्रांडिंग और उत्पाद प्लेसमेंट ने डोम्स को बच्चों और छात्रों के बीच एक लोकप्रिय नाम बना दिया।

‎मजबूत वितरण नेटवर्क: आज, कंपनी के भारत में 11 से अधिक विनिर्माण संयंत्र और 3770 से अधिक स्टोरेज हाउस हैं, जो एक मजबूत पहुंच सुनिश्चित करते हैं।

‎IPO की सफलता: हाल ही में एक सफल आरंभिक सार्वजनिक पेशकश (IPO) के बाद, डोम्स भारत की सबसे बड़ी स्टेशनरी कंपनी बन गई है, जिसने बाजार के पुराने खिलाड़ियों को पीछे छोड़ दिया है। 

‎पेंसिल सहित स्टेशनरी के सामान बनाने वाली कंपनी DOMS इंडस्ट्रीज लिमिटेड आईपीओ के जरिए शेयर बाजार में लिस्टिंग चाहती है। कंपनी सेबी के पास अपना ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस दाखिल कर चुकी है। कंपनी आईपीओ के जरिए 1200 करोड़ रुपये जुटाने की योजना बना रही है। इस आईपीओ में 350 करोड़ रुपये तक का एक फ्रेश इश्यू और 850 करोड़ रुपये तक बिक्री प्रस्ताव यानी ओएफएस शामिल हैं।

‎BusinessKhabri.com


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